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दिशा-निर्देश

सार्वजनिक भवनों में व्येवसायिकों के वास्तुबकीय योगदान के प्रति आभार व्यवक्तय करना

दिल्लीम नगर कला आयोग एक स्वातयत्तक निकाय है जिसकी स्थापपना 1973 के अधिनियम के अंतर्गत हुई है । आयोग ने उपर्युक्ता विषय पर निम्नअ मार्गदर्शी सिद्धांत जारी किये हैं :
- सभी विद्यमान सार्वजनिक भवनों की सौन्दुर्यपरक गुणवत्ताअ को बनाये रखने के लिए, मौलि‍क वास्तु विद की अभिकल्पनना को उचित सम्मा्न देते हुए, उचित रखरखाव की आवश्य कता है ।
- यदि मालिक द्वारा बाहरी अग्रभाग में कोई परिवर्तन किये जाने का प्रस्ता व हो तो, यह सुनिश्चिमत करने के लिए कि, भवन की वास्तुककीय अभिव्य्क्ति के साथ कोई छेड़-छाड़ न हो, मूल डि़जाइनर वास्तु विद की सहमति लेना महत्वोपूर्ण है ।
- सभी विद्यमान और प्रस्तालवित परियोजनाओं में उचित स्था न पर वास्तुिक, इंजीनियर, मालिक, बिल्डार आदि के नाम को दर्शाते हुए पट्टिका लगाई जाए ।
उपर्युक्तु मार्गदर्शी सिद्धांतों का सभी सम्बंमधित सार्वजनिक भवनों के मालिक / प्रोमोटरों द्वारा अनुपालन किया जाना अपेक्षित है ।
सचिव
दिल्लीक नगर कला आयोग