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आप और दिल्ली नगर कला आयोग

प्रोजेक्ट-प्रस्ताव पेश करने की विधि

आयोग को पेश किये जाने वाले प्रस्तावों की श्रेणी का उल्लेख 7 फरवरी 2006 के कार्यालय ज्ञापन में किया गया है । सभी प्रस्ताव आयोग को निर्धारित प्रपत्र में भेजे जाने चाहिये । यह प्रपत्र डी0यू0ए0सी0 वेब साइट (www.duac.org) से लिया जा सकता है अथवा आयोग (डी0यू0ए0सी0) के कार्यालय से प्राप्त किया जा सकता है । आयोग को प्राप्त प्रस्तावों पर ''पहले प्राप्त-पहले जांच'' के आधार पर कार्यवाही की जाती है । प्रस्ताव या प्रोजेक्ट और नक्शे आदि, जहाँ स्थानीय निकायों की मार्फत प्रस्तुत करने होते हैं, वहीं प्रस्तावक / वास्तुविद से प्रोजेक्ट का प्ररूप (माडल) आयोग को सीधे भेजने की अपेक्षा की जाती है । प्रस्तावों पर विचार करते समय आयोग का आग्रह होता है कि प्रस्ताव से संबंधित नक्शे और माडल एकदम संगत हों ।
किसी प्रस्ताव के आयोग की बैठक के एजेन्डा में शामिल होने पर, संबंधित वास्तुविद को बैठक से पहले सूचित किया जाता है और उससे अपेक्षा की जाती है कि उसके प्रस्ताव पर विचार-मंथन के अवसर पर वह आवश्यक पूछताछ के लिये आयोग में उपस्थित रहे । आयोग के अभिमत यदि कोई हों, के आधार पर अनुमोदित नक्शों सहित आयोग की आख्याएं, वापस स्थानीय निकाय को भेजी जाती हैं । डी0यू0ए0सी0 सहित संबंधित एजंेसियों की आख्याओं के आधार पर, परियोजनाओं बावत लिया गया निर्णय, स्थानीय निकाय द्वारा संबधिंत वास्तुविद / प्रस्तावक को सूचित किया जाता है ।
प्रारंभिक - स्तरीय प्रस्तावों पर विचार
स्थानीय निकायों की मार्फत भेजे जाने वाले प्रस्तावों पर विचार-मंथन के अलावा, आयोग द्वारा प्रस्तावकों/ पेशेवरों से सीधे प्राप्त प्रारंभिक या-प्रारूप स्तरीय प्रस्तावों पर भी विचार किया जा सकता है । इस स्तर के प्रस्तावों पर विचार करने की मंशा आयोग की अपेक्षाओं को समझने में प्रस्तावकों की मदद करना है, ताकि अंतत: स्थानीय निकाय की मार्फत प्राप्त प्रस्ताव / प्रोजेक्ट में नाममात्र के परिवर्त्तन / संशोधन हों ।
प्रस्तावक / वास्तुविद को चाहिये कि प्रस्ताव / प्रोजेक्ट पर विचार किये जाने से पूर्व, वह उस पर मुख्य अग्निशमन अधिकारी कार्यालय से सहमति प्राप्त कर लें । मुख्य अग्निशमन अधिकारी कार्यालय की एक अपेक्षा यह होती है कि परियोजना स्थल के सभी-हिस्सों में अग्निशमन गाडिय़ाँ/ यंत्र आसानी से आ-जा सकें ।
दिल्ली नगर कला आयोग को पेश की जाने वाली परियोजनाओं (प्रोजेक्ट) बावत अपेक्षित सूचना / दस्तावेज़ / सामग्री
स्थल-नक्शा, जो 1:200 के पैमाने से कम न हो । इस नक्शे में स्थल पर और उससे सटी जमीन की बनावट, ढलानों, वहाँ खड़े वृक्षों व मौजूदा ईंट ढांचों को, उनकी ऊँचाई और अनुमानित फासले सहित, दरसाया जाना चाहिये । उसमें अवस्थिति खाका दिया गया हो, जिसमें आसपास के क्षेत्र के सीमाचिन्हों, स्मारकों, महत्वपूर्ण सड़कों व अन्य निर्माणों को प्रदर्शित किया गया हो ।
नवीनतम स्थल चित्र (फोटो): स्थल और उसके परिवेश को इमारतों सहित, यदि हों, को न्यूनतम आकार 6 x 10 इंच चित्रों में दरसाया जाए । जिन कोणों से फोटो लिये गये हों, उन्हें भी विन्यास नक्शे में दिखाया जाए ।
विशाल भवनों / समूह-आवासों के लिये न्यूनतम 1:200 पैमाने पर विस्तृत माडल (जो काठ या प्लास्टिक में कुशल कारीगरी स्तर के हों) तथा छोटे भवनों के लिये न्यूनतम 1:100 पैमाने पर विस्तृत माडल और साथ में विभिन्न कोणों से लिये गये 4 फोटो (आकार 8 x 10 इंच) । अगर प्रस्ताव किसी बड़े परिसर का हिस्सा हो तो समग्र परिसर का ब्लॉक माडल (प्रतिरूप) भी पेश करें ।
सभी नक्शे और समुचित रेखाओं से युक्त उभार डिज़ाइन तथा वास्तुकीय अभिव्यक्ति (दो प्रतियों में) और उनके साथ यथा-आवश्यक दर्शनीय / कल्पनामूलक ड्राइंग्स । यदि प्रस्ताव किसी बड़े परिसर का हिस्सा हो तो, उस परिसर का व्यापक नक्शा संलग्न करें ।
उभारों / अग्रभागों के प्रतिलेपन में प्रयुक्त सज्जा सामग्री का ब्यौरा, जो उभारों में दर्शाया गया हो ।
समस्त परिसर के लिये विशिष्ट तल स्तर का रेखा चित्र (स्थल नक्शा), जिसमें समूह परियोजनाओं के प्रसंग में अन्दर की डयोढ़ी (पोर्टिको) के ब्यौरे साफ-साफ दरशाये गये हों ।
तथ्य विवरण, जिसमें भवन की संकल्पना और उपयोगिता का उल्लेख हो । डिज़ाइन प्रभावी विशेष कारक । इनमें स्थल तथा उस पर लागू नियमों / विनियमों का समावेश हो, जो भूउपयोग, उऎँचाई प्रतिवंधों, दायरा नियमन / वासों बावत पार्किंग सूची तथा सुलभ पार्किंग, दायरा प्रतिशत तथा प्रदत्त एफ.ए.आर. (फर्श क्षेत्रानुपात) आदि बावत हों ।
भूदृश्यांकन प्रस्ताव की ड्राइंग में विभिन्न आयुवर्ग के बच्चों के लिये सहज सुलभ क्रीड़ा स्थलों, वृक्षारोपण स्थलों और विशिष्ट वृक्ष-प्रजातियों का अंकन किया जाना चाहिये । साथ ही पथ सज्जा व पथ प्रकाश व्यवस्था भू-तल से जल निकासी प्रणाली तथा चहारदीवारियों में प्रवेश-निकास द्वारों व उनकी डिज़ाइनों का अंकन होना चाहिये । इसके अलावा, प्रोजेक्ट स्थल पर खडे वृक्षों की संख्या और प्रोजेक्ट के कार्यान्वयन हेतु काटे जाने वृक्षों की संख्या का भी उल्लेख होना चाहिये ।
प्रस्ताव पर की विधिवत् जांच-परख और आयोग को उसकी प्रस्तुति, अपेक्षित पूर्ण जानकारी / दस्तावेज / सामग्री मिलने के बाद ही, की जाएगी ।