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दिल्ली नगर कला आयोग के पहल - प्रयास

नगर स्‍तरीय परियोजनाएं

दिल्‍ली में तीन मास्‍टर प्‍लान बनाये जाने तथा विभिन्‍न स्‍थानीय प्राधिकरणों के होने के बावजूद शहर के नागरिकों के जीवन की गुणवता अपेक्षा से कम है । आयोग ने महसूस किया कि यह महत्‍वपूर्ण है कि नियोजन प्रक्रिया में वस्‍तुस्थिति को उचित महत्‍व दिया जाये तथा शहर के बदलते स्‍वरूप को ध्‍यान में रखते हुए, योजनाओं का समय-समय पर पुर्नमुल्‍यांकन किया जाये । इस प्रक्रिया में, आयोग ने स्‍थानीय निकायों, वास्‍तुकों, नगर अभिकल्‍पकों, नगर नियोजकों, तथा अन्‍य विशेषज्ञों के साथ इस विषय पर क्रमवार विचार विमर्श किया । गहराई से विचार विमर्श करने के पश्‍चात् तथा विभिन्‍न वर्ग के विशेषज्ञों के सहयोग से आयोग का निम्‍न प्रस्‍तावों पर स्‍वयं कार्य आरम्‍भ करने का विचार है ।
1 वार्डस के लिए स्थाल विशिष्टम अभिकल्पा
दिल्ली विकास प्राधिकरण द्वारा मास्टर प्लान 2021 तैयार करने के कार्य को सम्पूर्ण करने के पश्चात् इसके अगले चरण के रूप में ज़ोनल प्लान भी तैयार किये गये हैं और ज़ोन डी को छोड़कर प्रत्येक ज़ोन के प्लान को दिल्ली विकास प्राधिकरण द्वारा अधिसूचित भी किया गया है । ज़ोन डी को अंतिम रूप दिया जाने का कार्य प्रगति पर है । इसका अगला चरण प्रत्येक ज़ोन के संदर्भ में लोकल एरिया प्लान या वार्ड प्लान बनाए जाने की प्रक्रिया को आरम्भ करना है । दिल्ली नगर कला आयोग एक ऐसा मंच है जिसके पास इन क्षेत्रों के संदर्भ में त्रिकोणीय अध्ययन हेतु विशेषज्ञता है । इस संदर्भ में आयोग ने आर.डब्यू.ए. और संबंधित क्षेत्रीय एम.एल.ए. आदि के साथ परामर्श कर भारत सरकार के समक्ष वार्ड प्लान विकसित किया जाने का प्रस्ताव रखा है, जिसकी विशेषता प्रत्येक वार्ड के लिए स्थल विशिष्ट अभिकल्प विकसित करना है ।
2 दिल्ली में अनधिकृत कालोनियों / स्लम का पुर्नवास
देश की तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था के साथ दिल्ली व्यापार तथा व्यवसायिक गतिविधियों का गढ़ बन गई है । इसने नगर में रोजगार की संभावनाएं बढ़ा दी हैं, इस कारण देश के विभिन्न प्रांतों से भारी संख्या में लोगो का राजधानी में प्रवेश हो रहा है । कम कीमत के मकानों के अभाव में जनसंख्या का बड़ा हिस्सा स्लम में रहता है । नगर में स्लम की संख्या 2000 से अधिक है । स्लम की अनियोजित वृद्धि रहवासियों के जीवन को कठिन बनाती है । इससे उत्पन्न कुछ समस्यायें इस प्रकार हैं : - जनसुविधाओं जैसे पानी, बिजली, नालियों आदि का अभाव
- सार्वजनिक शौचालयों का अभाव
- चिकित्‍सा सुविधाओं का अभाव
- कचरे के निपटान प्रक्रिया की अनुपस्थिति
- सही सड़कों का अभाव
- मानसून में बरसाती पानी का इकट्ठा होना इन स्लम को हटाया जाना मुश्किल है । इन स्लम के रहवासियों के जीवन में सुधार किये जाने की अत्या‍धिक आवश्यकता है । दिल्ली नगर कला आयोग का 10 स्लम तथा 10 अनधिकृत कालोनियों के पुर्नवास के अध्ययन को आरम्भ करने का प्रस्ताव है ।
3 दिल्ली का भावी स्वरूप
दिल्ली जोकि एक प्रगतिशील नगर है जिसमें विरासतीय तथा आधुनिक वास्तुकीय तथा इंजिनियरी संरचनाऐं हैं । नगर में बडे पैमाने पर अनधिकृत विकास है । दिल्ली में बाहर से आकर बसने वालों की संख्या अत्याधिक है । यह कुछ वजह हैं जिनके कारण दिल्ली के भावी स्वरूप का पुर्नवलोकन करने की आवश्यकता है ताकि दिल्ली में होने वाले भावी विकास कार्य इसकी विरासत की कीमत पर न हो ।
4 मैट्रो कारीडोर के साथ-साथ ऊंची इमारतों का विकास
दिल्ली में मैट्रो के विकास ने नगर सौंदर्य पर अद्वितीय प्रभाव डाला है । समय के साथ मैट्रो कारीडोर के साथ-सा‍थ सम्पति विकास का बढ़ना स्वाभाविक है । यह सुनिश्चित करने के लिए कि विकास सुनियोजित तरीके से हो न कि अव्यवस्थित तरीके से दि.न.क.आ. ने दिल्ली में विद्यमान मैट्रो कारीडोर के साथ ऊंची बिल्डिंगों के विकास के लिए विकास योजना तैयार किया जाना प्रस्तावित किया है ।
5 दिल्ली के बागीचों का पुर्ननवीकरण
दिल्ली में काफी संख्या में बगीचे हैं । लेकिन लोदी गार्डन जैसे कुछ ही पार्कों को छोड़कर अन्य बगीचों में भूसौंदर्य घटक तथा सुविधायें उम्मी़द से कम है । अत: इन बगीचों को सभी के लिए जीवंत स्थान बनाए जाने की आवश्यकता है । इसमें बगीचे में रेस्तरां, अजायबघर, एम्फी थियेटर, सार्वजनिक सुविधाएं आदि के प्रावधानों की संभावना को समाहित किया जा सकता है । मास्टर प्लान 2021 में यह प्रावधान विद्यमान है, तदनुसार इस प्रकार की सुविधाओं के प्रावधानों के लिए प्रस्तावों को प्रत्येक बगीचे के संदर्भ में पुर्नविलोकित किये जाने की आवश्यकता है । आयोग द्वारा दिल्ली विकास प्राधिकरण व केन्द्रीय लोक निर्माण विभाग के अन्तर्गत आने वाले बगीचों में प्रत्येक से दस दस बगीचों के अध्ययन का प्रस्ताव है ।
6 उच्च तकनीक सार्वजनिक शौचालयों के लिए प्रोटोटाईप और अभिकल्प तैयार करना ।
आयोग ने दिल्ली में सार्वजनिक शौचालयों की दयनीय स्थिति की प्रेक्षा ली है । यह आकलन किया गया है कि दिल्ली में 25 लाख महिलाएं प्रत्येद सुबह भोर होने से पूर्व अपने दैनिक कार्यों से खुले मैदानों में निवृत होती हैं । यह एक दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति है । आकलन किया गया है कि बस्ती तथा स्लम जहां अधिक संख्या में लोग हैं, इस प्रकार की सुविधाओं की आवश्यकता है । उनके निकट लगभग 5 लाख शौचालयों का प्रावधान किया जाने की आवश्यकता है । यह कार्य विभिन्न क्षेत्रों में 200 सार्वजनिक शौचालयों के निर्माण से आरम्भ किया जा सकता है । उद्देश्य है, उच्च तकनीक स्वत: स्वच्छ शौचालय जिनमें कम से कम रख रखाव की आवश्यकता हो और जोकि औद्योगिकी पूर्व निर्मित हों । अभिकल्प निर्माण एक मुक्त प्रतियोगिता द्वारा किया जाएगा जिसमें वास्तुविद्, औद्योगिक अभिकल्पक भाग ले सकते हैं और प्राकृत रूप बना सकते हैं जिसका दि.न.क.आ. द्वारा निरीक्षण, अनुमोदन और संस्थापन किया जायेगा ।
प्रतियोगिता दो चरणों में आयोजित की जाएगी :-
चरण 1 : ड्राईंग एवं मॉडल के साथ चार अनुमोदित अभिकल्‍प
चरण 2 : अनुमोदित अभिकल्‍प पर आधारित औद्योगिक इकाईयों द्वारा निर्मित चार प्रोटोटाईप