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आयोग की पहचान

इतिवृत

दिल्ली नगर कला आयोग की स्थापना वर्ष 1973 में संसद द्वारा पारित एक अधिनियम द्वारा 'भारत सरकार को दिल्ली भर में शहरी और पर्यावरणीय डिज़ाइन की सौंदर्यबोधक गुणवत्ता के परिरक्षण, विकास और रख-रखाव बावत सलाह देने तथा विभिन्न स्थानीय निकायों को ऐसे निर्माण कार्यों या इंजीनियरी क्रियाकलापों की परियोजना या विकास प्रस्ताव के बारे में परामर्श और मार्गदर्शन देने` के लिये की गई थी, जो आस-पास की रूपरेखा या सौंदर्यबोधक विशेषता या निकाय के दायरे में प्रदत्त किसी सार्वजनिक सुविधा पर असर डालती हो या जिसके असर डालने की संभावना हो ।
दिल्ली नगर कला आयोग के गठन के बाद के वर्षों में दिल्ली के क्षेत्रफल में काफी बढ़ोतरी हुई है और मकानों का सधनता के आधार पर निर्माण हुआ है, इससे मूल अधिदेश में सुपुर्द कार्यों की सार्थकता और भी अधिक बढ़ गई है । अब परिवेश और विरासत अति आवश्यक सरोकार बन गये हैं, तथा जहां निर्णयकारी निकायों की संख्या एक से अधिक हो, वहॉं समग्र शहर को एक सूत्र में बंाधे रखने में पहले की तुलना में अनेक कठिनाइयां पैदा हो रही हैं ऐसी स्थिति में शहर के घटक तत्वों के भविष्य को लेकर एक विज़न (संकल्पना) की महती आवश्यकता है ।
पिछले साल अप्रैल 2005 में वर्तमान आयोग के पदस्थापित होते ही नये दिशा-निर्देशों के साथ दिल्ली नगर कला आयोग ने नगर स्तर के सभी मुद्दों (पथ सज्जा से लेकर भवनों की सधनता एवं क्षितिज पर्यावरण) के बारे में समग्रतापूर्ण दृष्टिकोण अपनाने तथा विभिन्न प्रस्तावों पर स्थलों के आकार व अवस्थिति के अनुसार उनकी उत्कृष्टता के अनुरूप रूख अपनाने की नीति जारी रखी । आयोग का प्रमुख सरोकार, अगर 1970 के दशक में अनियंत्रित गगन चुम्बी निर्माणों के मुद्दों के बारे में था, और 1980 के दशक में एशियाई खेलों के आयोजन से जुड़े मुद्दों तथा 1990 के दशक में द्वारका के निर्माण एवं नई दिल्ली बंगला ज़ोन क्षेत्र को सुस्थिर-संतुलित बनाये रखने के सरोकारों को लेकर था, वहीं वर्तमान दशक के मुख्य सरोकार चार मुद्दों - खुले हवादार परिसरों, नदी क्षेत्रों और वनक्षेत्र को खतरे के शेष मामलों, एतिहासिक आबादी इलाकों में जीवन की गुणवत्ता, जीर्णशीर्ण व जर्जर इलाकों के सुरूचिपूर्ण कायाकल्प को सुनिश्चित करने की जरूरत तथा यातायात नेटवर्क (मार्गों) को मानवीय जीवन की रक्षा की खासियत के साथ अधिक सुविधाजनक बनाने की जरूरत को लेकर हैं । नगर स्तरीय मुद्दों को उजागर करने के बारे में दिल्ली नगर कला आयोग का महत्वपूर्ण प्रयास पिछले वर्ष ''दिल्ली का भावी स्वरूप - इमेज़िनिंग दिल्ली`` नामक प्रदर्शनी के आयोजन का था, जिसके बाद समान रूप से महत्वपूर्ण एक अन्य प्रयास भावी डिज़ाइन अभिकल्पों के मॉडल स्वरूप मानक संरचनात्मक ढाँचों के स्रज़न का था ।

आयोग के मुख्य क्रियाकलाप असंख्य समस्या / सरोकारों में विस्तीर्ण रहे हैं । आयोग ने नए मेट्रो मार्गों तथा राष्ट्रमंडल खेलों की परियोजनाओं तथा वर्तमान संस्थानों के विस्तारों की उनमें निहित पर्यावरण-परिवेश तथा एतिहासिक प्रतिवेश के संदर्भ में जांच परख की । शाहजहांनाबाद के कायाकल्प के उपायों की पहचान के लिये परस्परव्यापी कार्यदायरे वाली एजेंसियों को विचार-विमर्श के लिये बुलाया गया । संरचनात्मक ढांचे सुलभ कराने के लिये आयोग द्वारा शुरू की गई अग्रगामी परियोजनाओं के अन्तर्गत खिड़की गॉंव के प्रस्ताव तथा नई दिल्ली नगर पालिका परिषद की ज़ोनल विकास योजना पर कार्यवाही के प्रस्ताव शामिल थे । परिवहन-कारीडोरों (समर्पित मार्गों) के सुधार और विस्तार के अति आवश्यक मुद्दों और उनके समाधान पर काफी समय लगाकर सोच विचार किया गया है । दिल्ली के मास्टर प्लान पर चर्चा के लिये आयोग ने एक सेमिनार का आयोजन किया तथा पूर्वी दिल्ली और जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम के बीच प्रस्ताविक सम्पर्क मार्ग (लिंक रोड) के मुद्दों पर विचार मंथन के लिये इच्छुक वास्तुकारों की एक बैठक बुलाई गई ।